ज्ञान और धन दोनों में एक दिन अपनी श्रेष्ठता के प्रतिपादन पर झगड़ा उठ खड़ा हुआ दोनों अपनी अपनी महत्ता बताने और दूसरों को छोटा सिद्ध करते  थे अंत मैं निर्णय के लिए वे दोनों आत्मा के पास पहुंचे आत्मा ने कहा तुम दोनों कारण मात्र हो इसलिए श्रेष्ठ बात ही तुम्हें क्या है सदुपयोग किए जाने पर ही तुम्हारी श्रेष्ठता है अन्यथा दुरुपयोग होने पर तो तुम दोनों ही घृणित बन कर रह जाते हो