हर घर में देव संस्कृति का करना है अब प्रवेश।

करना है अब प्रवेश कोई घर में  बचे शेष।।

घोड़ा है अश्वमेघ का जाएगा हर प्रदेश।

जाएगा हर प्रदेश यह घूमेगा देश देश।।

 

दुनिया है बेखबर कि आगे मौत का है डर ।

मौत का है डर भाई लंबा है यह सफर ।।

फिर भी नहीं सोचता है तू  जा रहा किधर ।

तू जा रहा किधर बेखबर पाप की डगर ।।

 

सन्मार्ग पर चलने अब कसकर कमर हमें ।

जाना पड़ेगा हर जगह क्या देश क्या विदेश।।

हर घर में देव संस्कृति का प्रवेश ।

 

भगवान चाहते हैं पहले ज्ञान से सुधार ।

हो ज्ञान से सुधार हो करम में सुधार ।

देगी प्रकृति सजा यदि होता नहीं सुधार ।

इस पर करें मनुष्य सारे शांति से विचार ।।

 

लेकर त्रिशूल हाथ में शिवजी मचल रहे ।

ऐसा ना हो पर ले मुझे कोई  बचे न शेष ।।

हर घर में देव संस्कृति का प्रवेश ।।

 

दुखता हो दिल किसी का ऐसा नहीं करो ।

 ऐसा नहीं करो थोड़ा पाप से डरो ।।

हमको है प्यार आप से आए हैं इसीलिए ।

घोड़ा ये अष्वमेघ का लाए हैं इसलिए ।।